Speech Transcript
- “कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती” इसका उदाहरण प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना है।
- यह सरकार चलाने की मोदी शैली है। अलग-अलग विभागों की योजनाओं को एक दिशा में चलाकर और उनका कन्वर्जेंस करके परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
- आकांक्षी जिलों के मामले में यह प्रयोग हो चुका है। योजनाओं की कोई कमी नहीं है। सभी योजनाओं का सही दिशा में क्रियान्वयन हो जाए तो कोई जिला पीछे नहीं रह सकता।
- आकांक्षी जिलों के बाद प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना इसका उदाहरण है।
- नवरात्रि के दूसरे दिन की शुभकामनाएं। यह दिन नई ऊर्जा प्राप्त करने का है। सभी लोग यहां से धन-धान्य कृषि योजना के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए नई ऊर्जा लेकर जाएं।
- जिन तीन जिलों को पुरस्कृत किया गया है, उन्हें हृदय से बधाई।
- महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले का प्रेजेंटेशन देखा। जिले ने अच्छा काम किया है।
- आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले में पानी की कमी है। रायलसीमा के इस जिले ने कम पानी में भी बागवानी की फसलों से किसानों की आय बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
- बिहार के बांका में खाद की दुकानें बंद करवा दी गईं।
- इन तीनों जिलों का अभिनंदन। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, छत्तीसगढ़ के कोरबा और पंजाब के फाजिल्का जिलों में भी काम हुए हैं। अलग-अलग जिलों में हो रहे नवाचारों के लिए बधाई।
- जिला कलेक्टरों से आग्रह है कि योजना और कन्वर्जेंस के बारे में उन्हें बताने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे पहले से काम कर रहे हैं।
- हर जिले में वार्षिक कृषि कार्य योजना तैयार की जाती है। इसकी जिले में हर महीने नियमित समीक्षा होनी चाहिए।
- कलेक्टर अपनी टीम के साथ सही ढंग से समन्वय करें तो धीमी प्रगति वाले जिलों में भी गति बढ़ाई जा सकती है।
- जिन जिलों में धन-धान्य कृषि योजना के अलावा भी योजनाओं का बेहतर कन्वर्जेंस किया गया है, वहां अच्छे परिणाम प्राप्त हुए हैं।
- कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा, प्रगतिशील किसान, जल शक्ति मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण विभाग, सहकारिता मंत्रालय, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, छोटे उद्योग और कौशल विकास को एक दिशा में जोड़ने की जरूरत है।
- जल शक्ति मंत्रालय से पानी की मजबूत व्यवस्था हो सकती है। खाद्य प्रसंस्करण विभाग उपज की प्रोसेसिंग और उसकी बेहतर कीमत दिलाने में सहयोग कर सकता है।
- एफपीओ इस अभियान को नई ताकत दे सकते हैं। पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के माध्यम से भी बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
- छोटे उद्योग और कौशल विकास गांवों में नए काम और रोजगार के अवसर पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- जिन जिलों में प्रगति धीमी है, वहां बेहतर समन्वय के लिए अभियान चलाया जाए।
- सभी जिलों ने अपनी-अपनी कृषि कार्य योजना तैयार की है। अब नियमित समीक्षा करके इसे जमीन पर उतारें। जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर गठित समितियां भी लगातार इसकी समीक्षा करें।
- नोडल अधिकारियों की भूमिका सही ढंग से मार्गदर्शन करने की है। उनके काम की भी समीक्षा की जाए, ताकि लगातार संवाद बना रहे।
- हर जिले में नवाचारी और प्रगतिशील किसान मिलेंगे। उन्हें योजना से जोड़ने और प्रशिक्षित करने की जरूरत है। जब एक किसान अच्छा काम करता है तो दूसरे किसान उससे सीखते हैं और इससे अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं।
- कृषि विज्ञान केंद्रों, कृषि विश्वविद्यालयों और आईसीएआर के अलग-अलग संस्थानों में कुल मिलाकर लगभग 16 हजार वैज्ञानिक हैं। उन्हें एक दिशा में लगाया जाए और तय किया जाए कि किस जिले में किस विषय पर ध्यान देना है। वैज्ञानिकों का पूरा सहयोग लिया जाए।
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा से काम में तेजी आती है। 100 जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 में जितना था, वह जुलाई में बढ़कर 30.5 हो गया। अगस्त तक वार्षिक लक्ष्य का लगभग 57 प्रतिशत पूरा कर लिया गया।
- नीति आयोग की मॉनिटरिंग के परिणाम सामने आए हैं। अच्छे काम के लिए सभी को बधाई।
- भागीरथ चौधरी जी ने खेत बचाओ अभियान का उल्लेख किया। खेत बचाओ अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक चलाने का फैसला किया गया है।
- अभियान के उद्देश्य:
- उर्वरकों का संतुलित उपयोग।
- नकली खाद, नकली और घटिया बीज तथा नकली कीटनाशकों पर रोक।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों और कीटनाशकों का इस्तेमाल।
- इन जिलों में खेत बचाओ अभियान को आदर्श तरीके से चलाने का प्रयास किया जाए।
- अच्छे काम करने वाले जिलों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने से काम करने वालों को प्रोत्साहन मिलता है और उनके काम का मूल्यांकन होता है।
- इस वर्ष बेहतर काम करने वाले जिलों को सम्मानित किया गया है। अगले वर्ष भी अच्छे काम करने वाले जिलों को सम्मानित किया जाएगा। इससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।
- प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हुए नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के बाद खेती के लिए व्यापक अवसर खुले हैं।
- प्रत्येक जिले में यह मैपिंग की जाए कि दुनिया के किन देशों में किन कृषि उत्पादों की जरूरत है। फल, सब्जियां, अन्य कृषि उत्पाद और अनाज किन बाजारों में भेजे जा सकते हैं, इसका अध्ययन किया जाए।
- शून्य प्रतिशत आयात शुल्क पर दुनिया भर में उत्पाद भेजने के अवसरों का लाभ उठाया जा सकता है।
- जिले में योजना बनाई जाए कि किस गुणवत्ता के उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकते हैं। जिले, प्रदेश और पूरे देश की मांग को समझकर उत्पादों की गुणवत्ता बेहतर की जाए।
- खेती को मांग आधारित बनाया जाए, ताकि किसानों को अधिक लाभ मिल सके।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में वैभवशाली, गौरवशाली, संपन्न, समृद्ध, शक्तिशाली, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का महायज्ञ चल रहा है। प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना इसी की एक कड़ी है।
- इन जिलों का चयन इस आधार पर किया गया है कि वे पीछे क्यों रहे। उनकी उत्पादकता कम है या फसल सघनता कम है अथवा ऋण का प्रवाह कम है।
- कई जगह तीन फसलें ली जाती हैं, जबकि कुछ जिलों में एक ही फसल होती थी। इन तीनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जिलों का चयन किया गया है।
- फसल लेने के बाद दलहन की खेती की जा सकती है। इंटरक्रॉपिंग भी एक अच्छा विकल्प है।
- कई राज्यों में किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से अच्छा ऋण मिलता है, जबकि पूर्वी भारत के राज्य पीछे रह जाते हैं। इन जिलों में कृषि ऋण का प्रवाह बढ़ाने की जरूरत है।
- अच्छी खेती के लिए निवेश की जरूरत होती है। यदि किसानों के पास पैसा नहीं होगा तो वे उन्नत खेती कैसे करेंगे?
- रायलसीमा जैसे क्षेत्रों में जहां वर्षा बहुत कम होती है और पानी की हर बूंद के लिए परेशानी होती है, वहां भी बागवानी की फसलें उगाई जा सकती हैं। दूसरे क्षेत्रों में भी व्यावसायिक फसलों की संभावनाएं तलाशी जाएं।
- “कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।”
- कोशिश करके देखें, सफलता जरूर मिलेगी। योजना समझाने के बजाय हौसला बुलंद रखने की जरूरत है।
- यदि हम ठान लें तो दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। मनुष्य चाहे तो ब्रह्मांड पर भी कमांड कर सकता है।
- “तू जो चाहे पर्वत पहाड़ों को तोड़ दे। तू जो चाहे नदियों के मुंह को भी मोड़ दे। तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे। तू जो चाहे धरती को अंबर से जोड़ दे।”
- यह केवल कविता नहीं है, बल्कि हौसला, हिम्मत, काम करने की ललक, दिल में दर्द और तड़प का प्रतीक है।
- बड़ा लक्ष्य तय करें, उसकी पूर्ति के लिए रोडमैप बनाएं और उस पर चलते हुए कड़ी मेहनत करें। सफलता जरूर मिलेगी।
- सभी जिलों का फिर से अभिनंदन। प्रधानमंत्री जी के संकल्प को पूरा करने के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा और प्रयत्नों की परिसीमा करें। कोई कसर न छोड़ें।
- अगली बार तीन नहीं, बल्कि कई जिलों को एक साथ सम्मानित करने की उम्मीद है। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के कारण सभी जिले इतनी प्रगति करें कि कौन आगे और कौन पीछे है, यह तय करना कठिन हो जाए।
- प्रधानमंत्री जी ने लाल किले की प्राचीर से कहा था कि तीसरे कार्यकाल में तीन गुना अधिक ताकत से काम करेंगे। हम भी अपनी पूरी क्षमता लगाकर परिणाम लाकर दिखाएंगे।
- सभी की क्षमता पर विश्वास है। आगे बढ़ें और लक्ष्य हासिल करें।
- “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत।” उठो, जागो और अपने लक्ष्य को प्राप्त करके ही चैन की सांस लो।








