Speech Transcript
आज नवरात्रि का पहला दिन है और आज मैया शैलपुत्री के रूप में हमको आशीर्वाद देती हैं। सबसे पहले मैं दुर्गा मैया के चरणों में प्रणाम करता हूँ और उनसे यही प्रार्थना करता हूँ कि सुख, समृद्धि और ऋद्धि-सिद्धि अपनी जनता-जनार्दन की जिंदगी में आए और आप सबके घर और आँगन खुशियों से भर जाएँ।
आज नवरात्रि के पहले दिन के बावजूद भी इतनी बड़ी संख्या में आप उपस्थित हुए हैं। विशेषकर देवी स्वरूपा मेरी बहनें देखो, कब्जा तो बहनों का है। यह भाई तो एक कोने में सिमट गए हैं। मैं अपनी बहनों को प्रणाम करता हूँ। दुर्गा सप्तशती में दुर्गा मैया ने खुद कहा है कि जगत में जितनी स्त्रियाँ हैं, वे सब मेरी मूर्तियाँ हैं। दुर्गा मैया कहती हैं। तो मेरे लिए तो दुर्गा मैया जीवित-जागृत बैठी हैं। सब मेरी माताएँ हैं, मेरी बेटियाँ हैं।
मेरी बहनों, मेरे भाइयों और भांजे-भांजियों, दोनों हाथ जोड़कर, शीश झुकाकर आप सबको प्रणाम। आप सबको नमस्कार।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।
जो देवी जी की उपासना कर रहे हैं, मैं केवल इस क्षेत्र के लिए नहीं कह रहा हूँ, भोजपुर क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि सब भाइयों, बेटों और सारे समाज से कह रहा हूँ कि हम व्रत रखें, उपवास करें, झाँकी लगाएँ। ये नवरात्रि के आनंद और उत्सव के दिन हैं। मैया की सेवा-उपासना करें। मैं भी बचपन से मैया की उपासना करता हूँ और बड़ी ताकत मिलती है, बड़ी शक्ति मिलती है, ऊर्जा मिलती है। नवरात्रि के इन नौ दिनों में मैया से प्रार्थना करके मैं साल भर की ऊर्जा इकट्ठी कर लेता हूँ।
यह सब तो करें, लेकिन एक बात और कहूँ आपसे। देखो, यह सब किया, माँ की कितनी भी उपासना और पूजा की, लेकिन बेटियों और बहनों का सम्मान और इज्जत नहीं की, तो मैया प्रसन्न नहीं होंगी, भाई। वह प्रसन्न तभी होंगी, जब बेटियों की इज्जत होगी और बहनों का मान बढ़ेगा। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। देवता भी कहाँ रहेंगे? जहाँ माँ, बहन और बेटी की इज्जत होगी, मान-सम्मान होगा।
बेटियाँ देवियाँ हैं। मंच पर बैठे मित्रों से भी कह रहा हूँ और नीचे भी कह रहा हूँ कि इनका सम्मान जरूरी है। इनका सम्मान जरूरी है। यह भारत की संस्कृति है और नवरात्रि हमको यही सिखाती है। इसलिए मुख्यमंत्री रहते हुए भी हमेशा, और यहाँ भी आपने देखा होगा, पहले बेटियों की हमने पूजा की। मेरी छोटी-सी बेटी, आठ महीने की इला। आज मैंने तिलक करके देवी माँ की पूजा की। तुम देवी हो, बेटियाँ देवियाँ हैं। इसलिए उनका मान-सम्मान जरूरी है।
कोई भी समाज तभी आगे बढ़ सकता है, जब माँ, बहन और बेटी की इज्जत होती हो। आधी आबादी को छोड़कर कोई आगे नहीं बढ़ सकता। यह बताओ, सब बेटियों की इज्जत करोगे? जोर से बताओ, सब इज्जत करेंगे? बहनों का मान-सम्मान करेंगे? देखो, इसलिए कितनी योजनाएँ माननीय नरेंद्र मोदी जी, हमारे प्रधानमंत्री जी ने शुरू कीं। और जब मैं मुख्यमंत्री था, तब मैंने लाड़ली बहना योजना शुरू की। इसलिए कि बहनों के हाथ में जब तक पैसे की ताकत नहीं आती, तब तक भैया भी उनकी ज्यादा पूछ-परख नहीं करते।
लेकिन जब लाड़ली बहना के पैसे मिले और मैंने बहनों से पूछा कि बताओ, तुम्हारी जिंदगी में क्या फर्क पड़ा? परिवर्तन आया? तो मेरी बहनों ने कहा, "भैया, जरा घर में इज्जत बढ़ गई है। थोड़े ठसके से रहते हैं। सास भी बड़े प्रेम से बोलती है आजकल। पतिदेव भी पूछ-परख कर रहे हैं। पप्पू की मम्मी, अच्छी तो हो? पैसा कब आ रहा है?” यह केवल योजना नहीं थी। यह बहनों के सशक्तीकरण का काम था।
आज नवरात्रि के पहले दिन माँ को साक्षी मानकर मैं कहता हूँ कि मैंने बहनों की जिंदगी में बचपन से बहुत दुख देखे थे। हजार-दो हजार रुपये के लिए हाथ फैलाने पड़ते थे। कई बार पतिदेव भी नहीं देते थे। जब पैसे नहीं होते थे, तो मुँह लटकाकर रह जाती थीं। मायके भी नहीं जा पाती थीं। कहाँ से जाएँ? तो मुझे लगा कि उस समय मेरी गरीब और निम्न मध्यमवर्गीय परिवारों की बहनों के हाथ में अगर पैसे की ताकत होगी, तो ये बहनें आत्मविश्वास से आगे बढ़ पाएँगी। इसलिए लाड़ली बहना योजना बनाई। और फिर क्या चमत्कार हुआ, पता है? मध्य प्रदेश में योजना बनी, तो आसपास के प्रदेशों में भी बहनें कहने लगीं, "मामा ने दे दिया, तुम दो नहीं तो देख लेना।" धीरे-धीरे चुनावों में भी इसका असर दिखाई दिया।
अब पूरे हिंदुस्तान में कोई प्रदेश ऐसा नहीं है, जहाँ किसी न किसी रूप में ऐसी योजना न बनी हो। नाम अलग-अलग हैं। कहीं लाड़ली बहना, कहीं लड़की बहना, कहीं मैया सम्मान योजना। नाम अलग-अलग हों, लेकिन योजना हर जगह बनाई गई। हर सरकार ने बनाई कि बहनों को पैसा दो, नहीं तो चुनाव में मुश्किल हो जाएगी। इसलिए पूरे देश में बहनें एक ताकत बन गई हैं।
पहले यह माना जाता था कि गाँव में एक आदमी को साध लो, तो काम चल जाएगा। ज्यादा मेहनत करने की जरूरत नहीं। चलो, पटेल के घर चलो, सरपंच के घर चलो। पूरा गाँव साथ आ जाएगा। बाद में सोचा कि घर के मुखिया को साध लो, तो काम चल जाएगा। लेकिन अब समझ में आ गया है कि ऐसा नहीं है। अब तो बहनें ही ताकत हैं। अपने मन से जो मर्जी होगी, वही करेंगी।
एक बहन को कांग्रेस को वोट देने के कारण घर में पीटा गया था। कांग्रेस ने कहा, "वोट दे दो।" वह बहन मेरे पास आई, तो मैंने एफआईआर करवाई। उस समय बहनों की जिंदगी बदली और मुझे गर्व है। माता रानी के चरणों में प्रणाम करके कहता हूँ कि माँ, तूने ऐसा काम कर दिया कि पूरे देश की बहनों का मान-सम्मान बढ़ गया और वे आगे बढ़ रही हैं।
अब यह योजना मुख्यमंत्री जी ने जारी रखी है और हर सरकार को जारी रखनी पड़ेगी। सबको पता है कि बहनें गुस्सा हो गईं, तो फिर खैर नहीं है। अब पंद्रह सौ रुपये पहुँच गए हैं। कहाँ तक पहुँचना है अभी? अरे, बताओ ना! जोर से बताओ। इतने मरे-मरे मत बताओ, जोर से बताओ। कितने होने चाहिए? तीन हजार बढ़ेंगे, धीरे-धीरे। भैया परेशान मत होना यार। बहनों को आगे बढ़ने दो। यह जिंदगी बदलने का अभियान है। मुख्यमंत्री जी को भी धन्यवाद। यह बहनों की जिंदगी बदलने का अभियान है।
मेरी बहनों, प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में अभियान चल रहा है। आज मैं तुमसे कहने आया हूँ कि बहनों को गरीब नहीं रहने देना है। बताओ, गरीब रहना चाहिए क्या? गरीबी से बड़ा दुख और कोई नहीं है। कदम-कदम पर तकलीफ झेलनी पड़ती है। इसलिए मेरी बहनों, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों का गठन हुआ है। समूह वाली बहनों, देखो मेरी बहनों, यह अभियान केवल लाड़ली बहनों तक नहीं रुकेगा। अब अभियान आगे जाना है।
लखपति दीदी, मतलब दीदियों को लखपति बनाना है, बनाना है और बनाना है। लेकिन लखपति दीदी का मतलब एक बार समझा देता हूँ। लखपति दीदी का मतलब है, जिसकी आमदनी साल में कम से कम एक लाख रुपया हो, वह लखपति दीदी है।
अभी अठारह हजार समूह हैं और सात हजार बहनें लखपति बनी हैं। देखो, दो-तीन काम करने हैं। ध्यान से सुनना। एक तो जो बहनें अब तक समूह में नहीं जुड़ी हैं और गरीब हैं, उनको समूह में जोड़ना है। भाई, सब बहनों को समूह में जोड़ेंगे। बताओ, बोलो, आज बात करो। समूह में जोड़ेंगे। सबको समूह में जोड़ना है, नंबर एक। जो समूह में जुड़ी हैं, उनको काम-धंधे से लगाना है। ट्रेनिंग देकर, बैंक की सहायता देकर, सरकारी सहायता और बैंक का कम ब्याज वाला लोन देकर, ताकि वे काम-धंधा कर सकें। सब काम-धंधा करोगी ना? बताओ, सब बताओ।
देखो मेरी बहनों, वो दिन चले गए जब सुबह से लेकर रात तक चूल्हे-चौके में ही जिंदगी निकल जाती थी। सुबह चार बजे उठती थीं। चक्की पर जाकर पूरा आटा पीसती थीं। पीस-पीसकर आटा तैयार करो, फिर लकड़ी का इंतजाम करो, फिर चूल्हा जलाओ, आटा गूँथो, रोटी बनाओ और सबको खिलाओ।
मैं खिलाने का मना नहीं कर रहा। नहीं साहब, गुस्सा हो जाएँगे। लेकिन अब काम भी करना है, काम-धंधा, व्यापार और बिजनेस भी करना है। तभी तो पैसा आएगा। पैसा कहाँ से आएगा? समूह की यह योजना ट्रेनिंग देकर काम-धंधा शुरू करवाने की योजना है। अभी अपने भोजपुर क्षेत्र में सात हजार बहनें लखपति बन गई हैं। लेकिन अभी बहुत-सी बहनों को लखपति बनाना है।
यहाँ कोई लखपति दीदी हो, तो हाथ उठाएँ। अगर लखपति दीदी की सूची में कोई हो, तो हाथ उठाओ। अभी कम हैं, लेकिन अब लखपति दीदियों की संख्या बढ़ानी है। लखपति दीदियों को मंच पर बुलाकर सम्मानित भी करेंगे और यहीं से अलग-अलग चेक तथा अन्य चीजों के वितरण का काम भी होगा। तो ये झूठ-मूठ की लखपति नहीं हैं, ये सही में लखपति हैं। पूछ लेना तुम। जरा खड़ी हो जाएँ लखपति दीदी। आइए, देखो जरा। ये वो दीदी हैं, जो स्वयं सहायता समूह में काम करते-करते लखपति बनी हैं। मैं आपको दिखा रहा हूँ। दीदी, मैं आपको प्रणाम करता हूँ। आपने मेहनत की और आगे बढ़कर बताया है। अब सबको आगे बढ़ाना है। आपकी मदद भी चाहिए, दीदी। जितनी बहनें बची हैं, सबको कहो कि समूह में आ जाओ, समूह में आ जाओ।
समूह को फिर बैंक लिंकेज दिलाना है। बैंक लिंकेज दिलाकर लोन दिलाना है और लोन दिलाकर काम-धंधा शुरू करवाना है। मार्केटिंग करेंगी, ब्रांडिंग करेंगी, बनाया हुआ सामान बिकेगा और मेरी बहनें आगे बढ़ेंगी। मेरी बहनें लखपति बनेंगी। यह ऐसे ही सपना नहीं है, यह संकल्प है, संकल्प। तभी तो मंत्री रहने का मतलब है। नहीं तो ऐसे ही मंत्री बनकर क्या करोगे, भाई? अब प्रधानमंत्री जी ने यह काम मुझे सौंपा है, पूरे देश का। तो उस काम में हम लगे हैं।
अपने रायसेन जिले में कमल जी एक योजना बना रहे हैं। हमको गरीबी-मुक्त गाँव बनाना है। आप सबसे भी कह रहा हूँ, गरीबी-मुक्त गाँव। गरीबी-मुक्त गाँव का मतलब है कि हमने सोचा है कि हर परिवार के पास एक न एक आजीविका हो, एक न एक काम-धंधा हो। यह कठिन है, असंभव नहीं है।
अभी मैंने भारत सरकार की टीम भेज दी है। अभी मीटिंग करने वाले हैं अपन। रायसेन में तारीख आगे बढ़ गई है। मैं ऐसे गप मारने नहीं आया, मामा। हर परिवार को एक आजीविका से जोड़ना है। कोई न कोई काम-धंधा चाहिए कि नहीं चाहिए? बताओ। हम फोकट की राजनीति करने नहीं आए। हर परिवार को आजीविका से जोड़ना है।
खेती से संबंधित प्रोसेसिंग का काम हो, पशुपालन हो, मछली पालन हो, बकरी पालन हो, गाय पालन हो, मधुमक्खी पालन हो या बिजनेस-व्यापार हो। कई तरह के मॉडल बना रहे हैं। इसी महीने रायसेन में मीटिंग करने वाला हूँ। भारत सरकार की पूरी टीम आएगी। प्रदेश सरकार की टीम आएगी। बैठकर हर गाँव की मैपिंग करेंगे कि किसके पास काम-धंधा नहीं है। फिर उसको काम से जोड़ेंगे। दिल में हसरत है कि तुम्हारी हालत बदल दी जाए। इसी दिशा में पूरे देश में पहला मॉडल बना रहे हैं। गरीबी-मुक्त गाँव का पहला मॉडल रायसेन जिले में बनाएँगे। रायसेन जिले में बनाएँगे।
गरीबी कलंक है, भाई। किसी के माथे पर यह कलंक नहीं रहना चाहिए। मजबूरी में जिंदगी कितनी कठिन होती है। इसी को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। किसान भाइयों, अभी सुरेंद्र भाई बता रहे थे कि थोड़ी पानी की दिक्कत है और बिजली की किल्लत है। तो आज ही मुख्यमंत्री जी और बिजली मंत्री जी से बात की जाएगी कि इस क्षेत्र में पर्याप्त बिजली कैसे मिले। आज ही यहाँ से जाने के बाद चर्चा करेंगे। आपने 131 केवी का, थ्री का जो विषय बताया है, उसके बारे में भी आज बात करेंगे।
इसके बाद किसानों को भी मैं ट्रेनिंग पर भेज रहा हूँ। ट्रेनिंग किस बात की? अच्छी खेती की। अभी हमने भुवनेश्वर किसानों के एक समूह को भेजा है। मैं पैसा नहीं लगने देता। मामा ही व्यवस्था करवा रहा है। चिंता मत करो, रहना मुफ्त, खाना मुफ्त, जाना मुफ्त, आना मुफ्त और सीखना मुफ्त। दिल्ली में, भुवनेश्वर में, पंजाब में, पूरे देश में ले जाऊँगा तुम्हें, जहाँ अच्छी खेती होती है। वैज्ञानिक समझाएँगे, बताएँगे और पढ़ाएँगे। इस खेती की हालत हम मिलकर बदलेंगे।
खेती की हालत बदलना है। अब सोयाबीन-धान, सोयाबीन-धान, अकेले उससे काम नहीं चल रहा है। फलों की, फूलों की, सब्जियों की और औषधीय खेती करनी होगी। कल मैं खेत में गया था। एक वीडियो आज डाला होगा शायद। कैसे इंटरक्रॉपिंग कर रहा हूँ। आम भी लगे हैं और बीच में शिमला मिर्च लगी है। आम की छाया शिमला मिर्च को भी फायदा देती है। तरीका सीखना पड़ेगा। अब ऐसे नहीं चलेगा कि आए और काट लाओ। खेती बदलना है। ट्रेनिंग देंगे और सरकार की योजनाओं का लाभ देंगे।
फल, फूल, सब्जियों की प्रोसेसिंग के लिए भी काम करना है। कई देशों से समझौते हुए हैं, मोदी जी के नेतृत्व में, कि दुनिया भर में किस चीज की डिमांड है। वैसी चीजें भी हम पैदा करेंगे, ताकि किसानों को ज्यादा पैसे मिल पाएँ। एक्सपोर्ट भी करेंगे हम। उसकी योजना बना रहे हैं। जो दिल में तड़प है, तुम्हारी जिंदगी बदलने की, वह मैं आपको बता रहा हूँ। बहनों को लखपति बनाना है, किसानों की आमदनी बढ़ानी है और उसके साथ-साथ हर गाँव सड़क से जुड़ जाए।
आज 31 सड़कों की बात हुई है। अगल-बगल के छोटे-छोटे मजरे और टोले हैं। मौका मिला तो वैसे तो जब पंडित जी प्रसाद बाँटते हैं, तो सबको बराबर-बराबर देते हैं। लेकिन घर का कोई मोड़ा-मोड़ी आ जाए, तो मुट्ठी थोड़ी खुल जाती है। ज्यादा दे देते हैं, ले जा, ले जा। इसलिए भोजपुर आया, तो मुट्ठी खुल गई। ले जाओ, ले जाओ। अब 31 हुई हैं, 30 और रह गई हैं। जरा उनका भी जुगाड़ लगाते हैं। आबादी का मापदंड रहता है, तो थोड़ा देखकर करना पड़ता है।
और सुनो मेरी बहनों और भाइयों, पिछले साल जब से मैं मंत्री बना हूँ, पिछले साल कितने मकान दिए थे वहाँ? रखिए, ले। वे हो गए थे, लेकिन पिछले साल ही जो दिए हैं, 28 हजार पिछले साल दिए। और इस साल, अभी जो सर्वे हुआ है, सर, उसमें एक लाख 25 हजार पात्र हैं। और उसके पहले 38 हजार कुछ दिए थे। जैसे ही मैं ग्रामीण विकास मंत्री बना, रायसेन जिले में 15 हजार मकान पहले दिए। इस साल 38 हजार मकान और दिए जाएँगे, उन लोगों के लिए जो कच्चे घरों में रह रहे हैं। कच्चे घरों के पक्के मकान बनने चाहिए कि नहीं? बताओ।
इसलिए प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत रायसेन जिले में 38 हजार पक्के मकान दिए जाएँगे। तो मुझे लगता है, सुरेंद्र जी, आपका हिस्सा 8-10 हजार का तो हो गया, भोजपुर का। नहीं-नहीं, अब इस साल वाला कह रहा हूँ, नए वाले। तो हर पंचायत में कुछ न कुछ घर आएँगे। इसके बाद सर्वे करवाया, तो सर्वे में आए एक लाख 32 हजार। एक लाख 32 हजार नहीं, एक लाख 25 हजार पात्र हैं। मतलब बाकी के कुछ घर पक्के थे, इसलिए वे पात्र नहीं हैं।
तो सवा लाख मकान रायसेन जिले में और बनाए जाएँगे। पैसा दिया जाएगा बनाने का। हर साल ऐसे ही देंगे। कभी 38 हजार, कभी 40 हजार। ऐसे करके एक ही साल में सबके मकान नहीं बन जाएँगे। कुछ के एक साल में, कुछ के दूसरे साल में, कुछ के तीसरे साल में बनेंगे। कोशिश यह रहेगी, मेरे बहनों और भाइयों, कि सबके पक्के घर बन जाएँ। सर्दी, गर्मी, बरसात में आराम से रहें। छोटा भले ही हो, लेकिन पक्का तो हो जाए, ताकि आराम से जी सकें। इसलिए मकान बनाने का अभियान चल रहा है।
गाँव के पूरे विकास के लिए विकसित भारत जी राम जी योजना है। अध्यक्ष महोदय, जनपद पंचायत के अध्यक्ष और सरपंचों से कह रहा हूँ, सुनो रे भाइयों! सरपंच कौन-कौन हैं? जरा हाथ उठाओ। कोई है क्या सरपंच यहाँ पर? पीछे बैठे हैं? अच्छा, नीचे भी बैठे हैं? जब तरीके से योजना बना लो, कितना पैसा आ रहा है साल में, पता है? एक लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये पूरे देश के लिए विकसित भारत जी राम जी में। गाँव में आपको प्लान बनाना पड़ेगा। कौन-सा काम अच्छा होगा, यह तय करना पड़ेगा। यह तय कर दिया है कि काम वहाँ से तय नहीं होगा, दिल्ली से नहीं होगा, भोपाल से भी नहीं होगा। गाँव की जनता बैठकर कहेगी कि जो चीज बननी चाहिए, वही बनेगी।
गाँव में विकास के जितने छोटे-मोटे काम होने हैं, उनके प्रस्ताव विकसित भारत जी राम जी में करवा दो। उसमें खेत की सड़क भी शामिल की जा रही है। तो अपना गाँव विकसित बन जाए। और इसलिए आज मैं खेती की, बाड़ी की और दूसरी चीजों की बात कर रहा हूँ। खेती में नहर के पानी का विषय भी आया है, तो जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से बात करेंगे।
आपकी जिंदगी बदले, यही अपनी जिंदगी का मकसद है। हम आपके सेवक हैं, सेवक। जनता की सेवा ही भगवान की पूजा है।
आज कई किसानों को अच्छे बीजों का वितरण भी होगा। किसान क्रेडिट कार्ड भी बँटेंगे। अलग-अलग योजनाओं के यंत्र भी बँटेंगे और योजनाओं का लाभ भी मिलेगा, ताकि आप बेहतर ढंग से काम करके अपने घर की स्थिति बढ़िया कर पाएँ।
भांजे-भांजियों के लिए सीएम राइज जैसे स्कूल भी बन रहे हैं, जिनका नाम अब मुख्यमंत्री जी ने सांदीपनि विद्यालय किया है। इस विधानसभा में अभी दो विद्यालय हैं।
एक और चीज रायसेन में शुरू करने वाले हैं। मैं खुद मामा कोचिंग क्लास शुरू करने वाला हूँ। जो भर्तियाँ निकल रही हैं, पुलिस की और दूसरी सरकारी नौकरियों की, उनके लिए कोचिंग क्लास चालू करेंगे, ताकि बच्चों का चयन हो सके। ताकि सरकारी नौकरियों की भर्ती में बच्चों का चयन हो सके।
और बहनों, एक बात और। बहनों और बेटों, सब से कह रहा हूँ। एक आरसेटी की योजना है, जिसमें तुम्हें ट्रेनिंग दी जाएगी। अभी रायसेन में एक बैच की ट्रेनिंग चल रही है। वह शायद 10 तारीख तक पूरी होनी है। उसके बाद दूसरे लोगों को ट्रेनिंग के लिए बुलाऊँगा। यह सरकारी नौकरी नहीं, बल्कि अपना काम-धंधा और बिजनेस करना चाहते हैं, तो उसके लिए भी ट्रेनिंग दे रहे हैं। उसी ट्रेनिंग के आधार पर मंडीदीप या दूसरी जगह नौकरी भी मिल सकती है, क्योंकि हाथ में काम होगा, तो ठीक से नौकरी मिल सकती है।
अब ये भांजे-भांजियों के लिए जरूरी है। खेल का ग्राउंड? अब यह देखना पड़ेगा कि ग्राउंड कहाँ-कहाँ हैं। अच्छा, यह तो विनय के ही वाले मान गए। तो फॉरेस्ट वालों, यार, खेलने-कूदने दो। बच्चों को इतना परेशान क्यों होते हो? आप देखिए कि यहाँ खेल का मैदान हो जाए।
मामा खेल प्रतियोगिताएँ भी शुरू करने वाला है। पता है? अच्छा, इस बार केवल बच्चों का खेल नहीं होगा, बहनों का भी खेल करवाऊँगा। गाँव में रस्साकशी हो, फलाना खेल हो। जिंदगी में थोड़ी हँसी-खुशी भी होनी चाहिए कि नहीं? नहीं तो घर से ही नहीं निकल रहे, कई दिनों से हँसे ही नहीं। ऐसी जिंदगी किस काम की? तो तीन-चार खेल बहनों के तय करेंगे। सास-बहू रस्साकशी करेंगी, देखते हैं कौन जीतता है। बहनों के खेल भी चालू करेंगे। इस बार बुजुर्गों के लिए भी कुछ होगा। बेचारे वे भी तो हँसें-खेलें। दादाजी घर में पड़े रहते हैं, कोई पूछता ही नहीं। देखो, सबकी जिंदगी में हँसी-खुशी आए।
अगर मुस्कुरा दिए, जिंदगी मुस्कुरा दी, तो अपनी जिंदगी सफल हो गई, भाई। और इसमें जितने दिव्यांग हैं, विकलांग दिव्यांग भाई-बहन, उनके लिए मैंने कहा है कि इस क्षेत्र में कोई भी ऐसा नहीं रहने दूँगा, जिसके पास बैटरी वाली, मोटर वाली साइकिल न हो। वह भी देने का काम कर रहा हूँ। कई लोगों को मिली है। कोई रह गया हो, तो और बताना।
जो दिव्यांग भाई-बहन हैं, उनके लिए सहायता जारी रहेगी। खेल भी, दिव्यांगों को सहायता भी और ऐसी कई तरह की गतिविधियाँ होंगी। अरे, जीना उसका जीना है, जो औरों को जीवन देता है। नहीं तो जीने का क्या मतलब है? बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी दो अस्पताल बने हैं। वहाँ इलाज की व्यवस्था बेहतर हो जाए, इसकी कोशिश की जा रही है।
उमरावगंज के लिए भी मोहन सरकार लगातार कोशिश कर रही है। अलग-अलग तरह के निर्माण और विकास के कई काम हो रहे हैं। मेरे बहनों और भाइयों, बस आप सब सुखी रहें, निरोग रहें। मंगल हो, कल्याण हो। बच्चों की जिंदगी भी बेहतर बने। इसी के लिए अपनी जिंदगी समर्पित है। जब तक जिएँगे, आपकी सेवा लगातार करते रहेंगे, लगातार करते रहेंगे, मेरी बहनों।
नल-जल योजनाओं पर काम चल रहा होगा अभी। देखो बहनों, कितनी कठिन जिंदगी थी। गर्मी के दिनों में सुबह चार बजे से कुएँ पर लाइन लगती थी। कई जगह कहते थे कि चूहा आ गया और पानी नहीं है अब। पहले हैंडपंप थे, लेकिन जब मैं मुख्यमंत्री बना, तभी योजना बनाई कि डैम का पानी खींचकर, साफ करके, पाइपलाइन बिछाकर और घर में टोंटी वाला नल लगाकर पानी देंगे। नहीं तो मुंडी पिलपिली हो जाती थी, पानी भर-भरकर। उस पर भी काम अभी जारी है। जरा ढंग से हो, इसकी कोशिश होनी चाहिए। हाँ, उस पर भी काम करेंगे। तो मेरी बहनों, यह कोशिश है जिंदगी बदलने की।
आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मुफ्त इलाज हो, सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में भी, उसके लिए भी कार्ड दिए जाएँगे। आपकी जिंदगी को बेहतर और आसान बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। आज नवरात्रि के दिन भी इतनी बड़ी संख्या में आप आए, मैं आपको हृदय से प्रणाम करता हूँ। फॉरेस्ट के मित्रों से इतना कहना है कि जो सड़कें अटकी हुई हैं, उनके मामलों को जरूर देख लें। कहाँ अटके हैं, एक बार जिला प्रशासन के साथ मिलकर देख लें, ताकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के काम न रुकें। क्योंकि उतनी अनुमति तो भोपाल के स्तर पर ही मिल जाएगी। जिला प्रशासन को भी देखना चाहिए। नहीं तो कई सड़कें, इनमें से 10-20, इसी वजह से रह जाएँगी कि फॉरेस्ट ने अनुमति नहीं दी। तो वह देख लीजिएगा। सड़क जैसे काम नहीं रुकने चाहिए। उसमें आप व्यक्तिगत रुचि लेकर चिंता करेंगे, तो ये सड़कें जल्दी बन जाएँगी।
ये सड़कें भी आपको समर्पित हैं। योजनाएँ भी आपको समर्पित हैं। एक बार मैया से फिर यही प्रार्थना करता हूँ कि आप सब पर कृपा और आशीर्वाद की वर्षा करें और आपकी जिंदगी बदल जाए। हे माँ! इतनी शक्ति देना कि मैं अपने इन भाई-बहनों और बेटे-बेटियों की जिंदगी बदल सकूँ। यही तुम्हारे चरणों में प्रार्थना है। बोलिए, भारत माता की!








