Shivraj Singh Chouhan
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21 November 2025 at 06:00 pm IST

महाराष्ट्र, नागपुर में 16वें एग्रो विजन एक्सपो के शुभारंभ कार्यक्रम में माननीय केन्द्रीय मंत्री जी के प्रमुख उद्बोधन बिन्दु

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नागपुर/महाराष्ट्र: एग्रो विजन के कार्यक्रम में मैं मेहमान बनकर नहीं किसान बनकर आया हूँ। मैं विशुद्ध किसान हूँ और ऐसा किसान नहीं कि खेत देखने ही नहीं जाता। मैं भी यहाँ सीखने आया हूँ। मैं नितिन जी और उनकी पूरी टीम को बधाई और धन्यवाद देना चाहता हूँ। किसान की आत्महत्याओं से दुखी होकर आपने संकल्प लिया कि विदर्भ के किसानों को इस त्रासदी से मुक्त करेंगे और देश के किसानों को नया रास्ता दिखाएंगे। केवल व्यथित होने से काम नहीं चलेगा, अगर कहीं दिक्कत है तो दूर करने के लिए प्रयास करना होंगे।


नितिन जी वो विजनरी लीडर हैं, जिनके पास की उपाय होते हैं, अभी नागपूर में देखा हमने नीचे रोड, ऊपर फ्लाईओवर और उसके ऊपर मेट्रो। नितिन जी खुद अपने गाँव में प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने एक किलो की प्याज पैदा की है, वो भी जैविक। एक नहीं ऐसे अनेक प्रयोग इन्होंने किए हैं।


खेती और पशुपालन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यहाँ बहनें बड़ी संख्या में बैठी हैं। यहाँ लाड़की बहना, मध्यप्रदेश में लाड़ली बहना और बिहार में जीविका बहना। ये लखपति बनें इसके लिए प्रयत्न करना जरूरी है। कृषि मंत्री के रूप में मैं अंतरात्मा से कहता हूँ कि किसान अन्नदाता है मतलब जीवनदाता है और आपकी सेवा ही मेरे लिए भगवान की पूजा है।


आज प्रारंभ में ही नितिन जी ने अच्छे बीज की बात की। ये ऑरेंज सिटी है और आपने पूरे देश को ऑरेंज की मिठाई खिलाई है। ऑरेंज में उत्पादन बढ़े इसके लिए जरूरी है क्लीन प्लांट। अच्छे पौधे के लिए अब हमने फैसला किया है क्लीन प्लांट सेंटर नागपुर में प्रारंभ किया जाएगा। इसकी लागत 70 करोड़ होगी।


किसान को अच्छे पौधे मिल जाएँ। अगर वो नर्सरी से एक पौधा लाया और उसमें वायरस है, क्योंकि जब हम नर्सरी से प्लांट लेते हैं तो उसमें पता नहीं चलता। तीन साल बाद किसान बर्बाद होता है। विदर्भ के संतरा उत्पादक किसानों, हम अच्छी नर्सरी चिन्हित करेंगे, उसको हम आर्थिक मदद देंगे। जो अच्छा क्लीन प्लांट तैयार करेंगे उनको बड़ी नर्सरी को 4 करोड़ और छोटी नर्सरी को 2 करोड़ रुपये देंगे।


हमारे यहाँ जीएम सीड्स अलाउ नहीं हैं लेकिन जीनोम एडिटिंग से हमने धान की दो नई किस्में बनाई हैं। मोदी जी का विजन है किसान की आमदनी दोगुना करना। आमदनी बढ़ाने के लिए उत्पादन बढ़ाना पड़ेगा। पहले हमारे साइंटिस्ट नहीं करते थे, अब वही रिसर्च होगी जिसकी जरूरत किसान को है।



आज अच्छे बीज के लिए रिसर्च चल रही है। 6% उत्पादन में वृद्धि करने में हमने सफलता प्राप्त की है और पिछले 10 साल में 44% उत्पादन बढ़ा है। हम अच्छे बीज तैयार करेंगे लेकिन हमें एग्रोविजन का सहयोग भी चाहिए।



जो अच्छा काम कर रहे हैं, वो साथ मिलकर एक प्लेटफ़ॉर्म पर आयें। फल, फूल, सब्जी का उत्पादन बढ़े। इसके साथ ही हमें उत्पादन की लागत घटानी पड़ेगी। अगर उत्पादन बढ़े और लागत भी बढ़े तो प्रॉफ़िट नहीं होता। मेकेनाइजेशन, माइक्रो इरिगेशन से लागत घटती है। अभी हम किसान को अनुदान पर कई कृषि उपकरण देते हैं। कई बार उपयोगी उपकरण नहीं मिलते। कस्टम हायरिंग सेंटर बनें जिससे किसान को खरीदना न पड़े, वो किराये से ले जाए। दुनिया में नई नई मशीनें आ रही हैं। मशीनें ऐसी बनें कि किसान की खरीदने की क्षमता भी हो।


उत्पादन की लागत घटाने के लिए प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में फर्टिलाइजर पर 2 लाख करोड़ की सब्सिडी देती है। यूरिया की एक बोरी 266 रुपये में मिलती है उसकी वास्तविक कीमत है 1,700 रुपये। पीएम किसान सम्मान निधि के साथ ही महाराष्ट्र सरकार प्रदेश की तरफ से 6 हजार रुपये देती है।


तीसरी चीज है उत्पादन के ठीक दाम मिलें। उस दिशा में हम कैसे MSP पर खरीदी करें। तुअर मसूर चना उड़द किसान कितनी भी पैदा करेगा उसे MSP पर खरीदा जाएगा। नुकसान हो जाए तो उसकी भरपाई जरूरी है। क्लाइमेट चेंज के कारण पता ही नहीं चलता कब बरसात होती है और कब सूखा पड़ जाएगा। इस बार तो 6 महीने पानी गिरा। किसानों की फसलें बर्बाद हो गई।


पीएम फसल बीमा योजना जोखिम कवर करती है और नुकसान हो जाये तो भरपाई करती है। महाराष्ट्र के किसान कह रहे थे कि कि जलभराव और जंगली जानवर से होने वाले नुकसान की भरपाई नहीं होती थी। अब हमने तय किया है कि इसके कारण फसल खराब हुई तो अब उसके नुकसान की भरपाई की जाएगी।

एक बड़ा काम है फसल का डायवर्सीफिकेशन और वेल्यू एडीशन। किसान जो पैदा करता है अगर उसकी प्रोसेसिंग स्थानीय स्तर पर हो जाए तो किसान को ठीक दाम मिल जाएँ। किसान जहां पैदा करता है वहाँ सस्ता मिलता है और वो चीज शहर में जाती है तो महंगी हो जाती है। जैसे टमाटर खेत पर 10 रुपये में मिलता है और शहर में 50 रुपये में मिलता है। हम इस गैप को दूर करने का काम करेंगे। आलू प्याज टमाटर जैसी फसलें अगर किसान पैदा करता है और उसे लगता है कि दिल्ली मुंबई में अच्छे रेट मिलेंगे तो हमने एक योजना बनाई है कि ट्रांसपोर्टेशन का सारा खर्च कृषि विभाग उठाएगा। राज्य सरकार की कोई संस्था खरीदे।


दलहन मिशन में हमने प्रावधान किया है जहां दाल पैदा होती है तो अगर कोई दाल मिल खोलता है तो 25 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाएगी। हम देशभर में ये चाहते हैं।


कई चीजें बनाना और दुनिया में पहुंचाना। इसमें कृषि विभाग सहयोग करेगा। ये एग्रो विजन अद्भुत प्लेटफॉर्म है। यहाँ किसान हैं, जिन्हें प्रैक्टिकल नॉलेज है। यहाँ साइंटिस्ट हैं, जिन्हें रिसर्च करना है। यहाँ प्राइवेट सेक्टर हैं, NDDV जैसी संस्था है, KVK हैं। एक ही जगह सभी को इकट्ठा कर के एक नई दिशा देने का काम एग्रो विजन कर रहा है। इसके लिए हृदय से धन्यवाद और बधाई।


आज भारत कृषि के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। आइडिया से इनोवेशन तक, मेकेनाइजेशन से डायवर्सीफिकेशन तक, इन्टीग्रेशन से इरिगेशन तक और सेटेलाइट से लेकर ड्रोन तक। हमें आज सिंचाई में ऑटोमेशन, मंडी में मॉडरनाइजेशन और खेतों में डायवर्सीफिकेशन की जरूरत है। और हम प्रयत्न कर रहे हैं और एग्रोविजन ने एक नया विजन हमें दिया है। यहाँ किसानों की ट्रेनिंग, ट्रेड, ट्रांसफॉर्मेशन होगा।


इस कार्यक्रम में उपस्थित आप सभी लोगों बहुत बधाई और किसानों, आप अपने सेवक का प्रणाम स्वीकार कीजिए।

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