

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक कर किसान आईडी, उर्वरक की उपलब्धता एवं विभिन्न कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की।
बैठक में केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि किसान आईडी किसानों को उनकी भूमि, फसल, पशुधन एवं मत्स्य पालन से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। अब तक 19 राज्यों में कुल 9.25 करोड़ किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य सरकारों के कृषि एवं राजस्व विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अगले 6 महीनों में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने की कोशिश करें। साथ ही व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसान रजिस्ट्री केवल पीएम-किसान लाभार्थियों तक सीमित न रहे, बल्कि सभी पात्र किसानों को शामिल किया जाए।
उर्वरक उपलब्धता पर चर्चा करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को खाद की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। राज्यों को जमाखोरी एवं कालाबाजारी पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित न्यायपूर्ण वितरण प्रणाली सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध हो सके, साथ ही असंतुलित उपयोग को रोकने एवं जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर बल दिया जाए।
सीमा क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने का निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि उर्वरक के अवैध आवागमन को रोकना आवश्यक है। हरियाणा के “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” पहल की सराहना करते हुए उन्होंने इसे अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय बताया।
पीएम-आशा योजना के अंतर्गत दलहन एवं तिलहन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की समीक्षा भी की गई। श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि इस योजना के अंतर्गत सरकार दलहन एवं तिलहन की खरीद MSP पर करती है तथा राज्य इसके दिशा-निर्देशों के अनुसार भाग लेते हैं।
हाल ही में विभिन्न राज्यों को निम्नलिखित फसलों की खरीद हेतु स्वीकृति प्रदान की गई हैं:
आंध्र प्रदेश (चना, मूंग, उड़द, अरहर, मूंगफली), असम (सरसों); बिहार (मसूर); छत्तीसगढ़ (चना, मसूर, सरसों); गुजरात (चना, सरसों); हरियाणा (चना, सरसों); कर्नाटक (चना, कुसुम); महाराष्ट्र (चना); मध्य प्रदेश (चना); राजस्थान (चना, सरसों); तेलंगाना (चना, उड़द, मूंगफली, सूरजमुखी); उत्तर प्रदेश (चना, मसूर, सरसों)।
केन्द्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि केवल FAQ (Fair Average Quality) की उपज की खरीद सुनिश्चित की जाए। किसानों का पंजीकरण आधार आधारित पोर्टलों पर किया जाए तथा खरीद केंद्रों पर बायोमेट्रिक या फेस ऑथेंटिकेशन अनिवार्य किया जाए। भुगतान आधार-सक्षम DBT के माध्यम से सीधे किसानों के खातों में किया जाए और साथ ही खरीद केन्द्रों की भी पर्याप्त संख्या हो जिससे किसान भाई-बहनों को समस्याओं का सामना न करना पड़े।
उन्होंने राज्यों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिले, शिकायतों का समय पर निवारण हो तथा खरीद सीधे किसानों से हो।
क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन पर दी गई ये जानकारी
इसके साथ ही क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन आयोजित करने के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि देश को पांच एग्रो-क्लाइमेटिक जोन में विभाजित कर व्यापक विचार-विमर्श किया जाएगा। इसके तहत वेस्टर्न जोन के लिए पहला सम्मेलन 7 अप्रैल को जयपुर में आयोजित किया जा रहा है।
विकसित कृषि संकल्प अभियान (VKSA) के बारे में मंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष यह अभियान अत्यंत सफल रहा जिसमें 728 जिलों के 60,000 से अधिक गांवों में वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं के बारे में जाना। उन्होंने कहा कि पूर्व की सफलता को देखते हुए राज्यों से इस साल भी मई माह में 15–20 दिनों का यह अभियान चलाने का आग्रह किया। इसका उद्देश्य लैब टू लैंड कनेक्ट को मजबूत करना, नई तकनीकों, किस्मों एवं कृषि पद्धतियों का प्रसार करना है।
इस अभियान में Indian Council of Agricultural Research एवं कृषि मंत्रालय का सहयोग रहेगा तथा राज्यों द्वारा नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएंगे। प्राथमिकता के क्षेत्रों में मृदा स्वास्थ्य, संतुलित उर्वरक उपयोग, गुणवत्तापूर्ण बीज के प्रति जागरूकता शामिल हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बैठक के अंत में कहा कि किसानों को उचित मूल्य, पारदर्शी खरीद प्रणाली एवं प्रभावी वितरण तंत्र सुनिश्चित करना राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी है जिससे कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाया जा सके। इस वर्चुअल बैठक में बिहार, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, हरियाणा, उत्तराखंड एवं मध्य प्रदेश के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
01 अप्रैल 2026
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