

रायसेन: केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान गुरुवार को रायसेन पहुंचे। उन्होंने यहां 11 से 13 अप्रैल तक आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के तीन दिवसीय कृषि मेला प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लिया। कार्यक्रम स्थल पहुंचकर उन्होंने बैठक व्यवस्था, विभिन्न सत्रों के लिए स्थल, स्टॉल और तकनीकों के सजीव प्रदर्शन सहित अन्य व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने मध्य प्रदेश शासन के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना, मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नारायण सिंह पंवार, सांची विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी, जिला पंचायत अध्यक्ष यशवंत मीणा, भाजपा जिला अध्यक्ष राकेश शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ विस्तार से चर्चा की।

देशभर से प्रगतिशील किसान और कंपनियां शामिल होंगी
केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारत सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त सचिव संजय अग्रवाल, निदेशक (किसान कल्याण एवं विस्तार) अविनाश लावनिया, मध्य प्रदेश शासन के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव निशांत बरबड़े, मध्य प्रदेश मंडी बोर्ड के एमडी कुमार पुरुषोत्तम और कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा सहित जिला अधिकारियों के साथ भी विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन क्षेत्र में कृषि को नई दिशा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
चौहान ने बताया कि यह मेला राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित हो रहा है, जिसमें किसानों के समक्ष खेती की विभिन्न उन्नत तकनीकों और पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय स्तर के कृषि मेला और प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश ही नहीं, देश के अन्य राज्यों से भी प्रगतिशील किसान, कृषि वैज्ञानिक और कृषि उपकरण बनाने वाली कंपनियां शामिल होंगी।
मंत्री ने जानकारी दी कि मेले में लगभग 200 से अधिक स्टॉल लगाए जाएंगे। इन स्टॉलों पर किसानों को कृषि से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी और विभिन्न तकनीकों का सजीव प्रदर्शन भी किया जाएगा।
शिवराज बोले- इससे किसान नया सीखेंगे
केन्द्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि किसानों को आय बढ़ाने के लिए परम्परागत खेती के अलावा फलों की खेती, फूलों की खेती, सब्जी की खेती, प्राकृतिक खेती, पशुपालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन आदि अपनाना होगा। यहां आयोजित होने वाले मेले में इन सभी प्रदर्शन किया जाएगा। किसानों को तकनीकी जानकारी देने के साथ ही लाईव प्रदर्शन भी होगा।
उन्होंने कहा कि उन्नत कृषि की कई नवीन पद्धतियां हैं, जिनका किसानों के समक्ष प्रदर्शन जरूरी है। तभी वह सीखेंगे और अपनाएंगे। मेले में उन्नत बीजों की जानकारी, कृषि पद्धति, रोगों की पहचान और उपचार, नकली उर्वरक या कीटनाशकों की पहचान, फसल कटने के बाद उसे सुरक्षित रखने, उपज का मूल्य कैसे बढ़ाएं, कच्चे माल की प्रोसेसिंग आदि इस प्रकार बीज से लेकर बाजार तक की जानकारी किसानों को दी जाएगी।
उन्नत खेती को लेकर अलग-अलग सत्र होंगे
भारत सरकार के कृषि विभाग के संयुक्त सचिव संजय अग्रवाल और मप्र शासन के कृषि विभाग के प्रमुख सचिव निशांत बरबड़े ने इस तीन दिवसीय कृषि उन्नत मेला और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजन की रूपरेखा के बारे में विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि लगभग 10 एकड़ से अधिक क्षेत्र में किसानों के लिए विभिन्न कृषि तकनीकों, खेती के प्रकार, उन्नत कृषि पद्धतियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
यहां अलग-अलग किसानों को उनकी रूचि अनुसार उद्यानिकी, प्राकृतिक खेती, इंट्रीग्रेटेड खेती, पॉली हाउस, नेट हाउस सहित अन्य भिन्न-भिन्न कृषि पद्धतियों की जानकारी के लिए सत्र आयोजित होंगे। इसके अतिरिक्त विभिन्न उन्नत कृषि यंत्र, उनके उपयोग से होने वाले लाभ आदि के बारे में बताया जाएगा। इस अवसर पर, पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ कमल सोलंकी, सहित अन्य विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
सोर्स: दैनिक भास्कर
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