

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रशासनिक व्यय बढ़ाकर 9% करने से कुल प्रस्तावित बजट 1.51 लाख करोड़ रुपये में से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों के लिए सुरक्षित होगी।
नई दिल्ली: प्रशासनिक व्यय को 6% से बढ़ाकर 9% किए जाने के फैसले पर रोजगार सहायकों ने खुशी जताई है। इसको लेकर भोपाल में विभिन्न राज्यों के रोजगार सहायकों ने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की और आभार जताया। इस मौके पर मंत्री ने कहा कि जमीनी स्तर पर कार्यरत रोजगार सहायकों, पंचायत सचिवों और तकनीकी स्टाफ को समय पर वेतन न मिलना एक बड़ी चिंता थी, जिसे दूर करने के लिए यह अहम निर्णय लिया गया है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि प्रशासनिक व्यय बढ़ाकर 9% करने से कुल प्रस्तावित बजट 1.51 लाख करोड़ रुपये में से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक राशि कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक जरूरतों के लिए सुरक्षित होगी। इससे वेतन भुगतान में देरी की समस्या खत्म होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राशि के उपयोग पर कड़ी निगरानी रहेगी और अनावश्यक खर्च जैसे वाहन आदि पर रोक लगेगी। नए प्रावधानों के तहत पहले वेतन भुगतान और उसके बाद अन्य खर्च किए जाएंगे, इसके लिए राज्यों को निर्देश दिए जाएंगे।
मंत्री ने कहा कि मनरेगा के स्थान पर लागू विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) - VB-G RAM G अब अधिनियम बन चुका है। इसके तहत रोजगार की कानूनी गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। खेती के पीक सीजन को ध्यान में रखते हुए राज्यों को 60 दिन तक कृषि कार्य के लिए अधिसूचना जारी करने का अधिकार भी दिया गया है, ताकि किसानों को श्रमिकों की कमी न झेलनी पड़े।
उन्होंने मजदूरी भुगतान को लेकर सख्त प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि 15 दिन में भुगतान नहीं होता है तो मजदूर को अतिरिक्त मुआवजा मिलेगा। मजदूरी दरें यथावत रहेंगी और हर साल तय फार्मूले से बढ़ेंगी। पिछले पांच वर्षों में मजदूरी में लगभग 29% की वृद्धि हो चुकी है।
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि योजना के तहत चार प्रमुख श्रेणियों में काम होंगे जल संरक्षण, ग्रामीण बुनियादी ढांचा (स्कूल, सड़क, नाली, आंगनवाड़ी), आजीविका आधारित कार्य (NRLM, FPO से जुड़े ढांचे) और प्राकृतिक आपदाओं से बचाव से जुड़े कार्य। उन्होंने जोर दिया कि विकसित ग्राम पंचायत योजना के तहत गांव का विकास गांव ही तय करेगा और योजनाएं सहभागिता से बनाई जाएंगी।
सोर्स: अमर उजाला
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