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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में मंगलवार को नई दिल्ली में कृषि मंत्रालय की साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति, एल नीनो के संभावित प्रभाव, दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्थिति, वर्षा की कमी वाले संवेदनशील जिलों, उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता तथा जलाशयों में जल भंडारण की समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को संवेदनशील जिलों में कृषि गतिविधियों की सतत निगरानी रखने और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
खरीफ बुवाई की प्रगति की समीक्षा
बैठक में बताया गया कि 17 जुलाई, 2026 तक देश में खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 658.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में कुल बुवाई क्षेत्र में कुछ कमी आई है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई में सकारात्मक प्रगति दर्ज की गई है। शिवराज सिंह चौहान ने दलहन, तिलहन और कपास मिशनों को राज्य सरकारों के साथ नियमित साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित करने तथा फील्ड स्तर से मिले फीडबैक के आधार पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
मानसून और एल नीनो की स्थिति पर हुई चर्चा
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमानों, संभावित एल नीनो परिस्थितियों और वर्षा के लिहाज से देश के 270 संवेदनशील जिलों की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान विभिन्न राज्यों में वर्षा, कम और अधिक बारिश वाले क्षेत्रों, फसलों की बुवाई की प्रगति तथा एनडीवीआई जैसे संकेतकों के आधार पर फसलों की स्थिति का आकलन किया गया। खरीफ मौसम के दौरान कृषि गतिविधियों के लिए अनुकूल परिस्थितियों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
पूरे देश में पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून
बैठक में बताया गया कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों को कवर करते हुए 9 जुलाई, 2026 तक पूरे देश में अपना विस्तार पूरा कर लिया। सामान्य तौर पर मानसून 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंचता है, जबकि इस वर्ष यह केवल एक दिन की देरी से पूरे देश में पहुंचा। इसके चलते अधिकांश राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हैं।
सामान्य से 23% कम रही वर्षा
बैठक में बताया गया कि 1 जून से 15 जुलाई, 2026 के दौरान देश में औसत वर्षा सामान्य से 23% कम रही। इस अवधि में देशभर में 227 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होती है। पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में सबसे अधिक 36% वर्षा की कमी दर्ज की गई। वहीं, दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 26%, उत्तर-पश्चिम भारत में 19% और मध्य भारत में 13% कम वर्षा हुई। मंत्री ने वर्षा की स्थिति पर लगातार निगरानी रखने और जरूरत पड़ने पर राज्यों के साथ समन्वय कर आकस्मिक कृषि प्रबंधन उपाय लागू करने के निर्देश दिए।
उर्वरक और बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर
बैठक में उर्वरकों, विशेषकर यूरिया, और बीजों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों और बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित है तथा राज्यों के साथ समन्वय के जरिए आपूर्ति की नियमित निगरानी की जा रही है। शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और राज्य सरकारों के माध्यम से जमीनी स्थिति की जानकारी लेने तथा किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वितरण प्रणाली में यदि कहीं कोई कमी हो तो उसका तत्काल समाधान किया जाए।
किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता
समीक्षा बैठक के अंत में शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्रालय के दोनों विभागों को निर्देश दिया कि राज्यों के साथ समन्वय, वैज्ञानिक सलाह, मौसम आधारित कृषि प्रबंधन और किसानों तक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए खरीफ मौसम के दौरान कृषि गतिविधियों की निरंतर निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। (इनपुट: पीआईबी)
सोर्स : डीडी न्यूज








